Gujarat सरकार ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को मंजूरी देकर बड़ा राजनीतिक और कानूनी कदम उठाया है। इस फैसले के बाद शादी, तलाक, उत्तराधिकार और पारिवारिक मामलों से जुड़े नियमों में एक समान व्यवस्था लागू करने की दिशा साफ हो गई है। बिल में खास तौर पर धोखे से शादी करने वालों पर सख्ती और लिव-इन रिश्तों के लिए रजिस्ट्रेशन जैसे प्रावधान चर्चा में हैं।
सरकार के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति अपनी पहचान छिपाकर, गलत जानकारी देकर या फर्जी दस्तावेजों के आधार पर शादी करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी। ऐसे मामलों में सजा और जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। सरकार का कहना है कि इससे महिलाओं के अधिकारों की रक्षा होगी और वैवाहिक विवादों में कमी आएगी।
लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी
Gujarat सरकार ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को मंजूरी देकर बड़ा राजनीतिक और कानूनी कदम उठाया है। इस फैसले के बाद शादी, तलाक, उत्तराधिकार और पारिवारिक मामलों से जुड़े नियमों में एक समान व्यवस्था लागू करने की दिशा साफ हो गई है। बिल में खास तौर पर धोखे से शादी करने वालों पर सख्ती और लिव-इन रिश्तों के लिए रजिस्ट्रेशन जैसे प्रावधान चर्चा में हैं।
सरकार के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति अपनी पहचान छिपाकर, गलत जानकारी देकर या फर्जी दस्तावेजों के आधार पर शादी करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी। ऐसे मामलों में सजा और जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। सरकार का कहना है कि इससे महिलाओं के अधिकारों की रक्षा होगी और वैवाहिक विवादों में कमी आएगी।
लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी नए नियम प्रस्तावित किए गए हैं। साथ रहने वाले जोड़ों को तय प्रक्रिया के तहत रजिस्ट्रेशन कराना होगा। सरकार का तर्क है कि इससे भविष्य में संपत्ति, बच्चों के अधिकार और विवादों से जुड़े मामलों को कानूनी आधार मिलेगा।
हालांकि इस फैसले पर विरोध भी सामने आया है। कुछ विपक्षी नेताओं और मुस्लिम विधायक ने बिल पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि व्यक्तिगत कानूनों और धार्मिक परंपराओं से जुड़े मुद्दों पर सभी समुदायों से व्यापक चर्चा होनी चाहिए थी। उनका आरोप है कि इतने संवेदनशील विषय पर जल्दबाजी ठीक नहीं है।
वहीं सरकार और समर्थक पक्ष इसे समानता की दिशा में बड़ा कदम बता रहे हैं। उनका कहना है कि एक राज्य, एक कानून की सोच से नागरिकों को समान अधिकार मिलेंगे और अलग-अलग कानूनी व्यवस्थाओं से पैदा होने वाली उलझन कम होगी।
राजनीतिक रूप से भी इस फैसले को अहम माना जा रहा है। गुजरात लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में रहा है, ऐसे में यहां UCC को मंजूरी मिलना दूसरे राज्यों में भी बहस को तेज कर सकता है। आने वाले समय में यह मुद्दा चुनावी चर्चा का हिस्सा भी बन सकता है।
फिलहाल गुजरात में यह फैसला सिर्फ कानून नहीं, बल्कि राजनीति और समाज दोनों के बीच बड़ी बहस बन गया है। एक तरफ समर्थक इसे सुधार बता रहे हैं, दूसरी तरफ विरोधी सवाल उठा रहे हैं। अब नजर इस बात पर है कि आगे इसका असर जमीन पर कैसा दिखाई देता है।