गुजरात में 1500 करोड़ रुपये के चर्चित जमीन घोटाले में जांच एजेंसियों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व कलेक्टर को गिरफ्तार किया है। इस मामले में एक डिप्टी तहसीलदार भी गिरफ्त में आया है। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने जमीन से जुड़े मामलों में फायदा पहुंचाने के बदले करीब 1 करोड़ रुपये रिश्वत ली।
जांच अधिकारियों के मुताबिक, यह मामला जमीन के रिकॉर्ड में गड़बड़ी, दस्तावेजों में हेरफेर और नियमों को नजरअंदाज कर कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने से जुड़ा है। शुरुआती जांच में सामने आया कि कई कीमती जमीनों के स्वामित्व और उपयोग से जुड़े रिकॉर्ड बदले गए, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचा।
सूत्रों का कहना है कि शिकायत मिलने के बाद एजेंसियों ने कई महीनों तक दस्तावेजों की
गुजरात में 1500 करोड़ रुपये के चर्चित जमीन घोटाले में जांच एजेंसियों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व कलेक्टर को गिरफ्तार किया है। इस मामले में एक डिप्टी तहसीलदार भी गिरफ्त में आया है। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने जमीन से जुड़े मामलों में फायदा पहुंचाने के बदले करीब 1 करोड़ रुपये रिश्वत ली।
जांच अधिकारियों के मुताबिक, यह मामला जमीन के रिकॉर्ड में गड़बड़ी, दस्तावेजों में हेरफेर और नियमों को नजरअंदाज कर कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने से जुड़ा है। शुरुआती जांच में सामने आया कि कई कीमती जमीनों के स्वामित्व और उपयोग से जुड़े रिकॉर्ड बदले गए, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचा।
सूत्रों का कहना है कि शिकायत मिलने के बाद एजेंसियों ने कई महीनों तक दस्तावेजों की पड़ताल की। बैंक खातों, लेनदेन और अन्य सबूतों की जांच के बाद पूर्व कलेक्टर और डिप्टी तहसीलदार की भूमिका संदिग्ध पाई गई। इसके बाद दोनों से पूछताछ हुई और फिर गिरफ्तारी की गई।
बताया जा रहा है कि जिन जमीनों को लेकर गड़बड़ी हुई, उनकी कुल कीमत करीब 1500 करोड़ रुपये है। इसी वजह से इसे राज्य के बड़े भूमि घोटालों में गिना जा रहा है। अब जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे। कुछ बिल्डरों, बिचौलियों और अन्य अधिकारियों के नाम भी जांच के दायरे में बताए जा रहे हैं।
गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्ष ने राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि प्रशासन में भ्रष्टाचार गहराई तक पहुंच चुका है। वहीं सरकार का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त नीति अपनाई गई है और किसी दोषी को नहीं छोड़ा जाएगा।
फिलहाल दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां जांच एजेंसियों ने रिमांड की मांग की है। माना जा रहा है कि पूछताछ के दौरान इस मामले में कई और नाम सामने आ सकते हैं। गुजरात में यह मामला प्रशासनिक जवाबदेही और जमीन घोटालों पर फिर से सवाल खड़े कर रहा है।