अक्षय कुमार और प्रियदर्शन की जोड़ी का नाम आते ही दर्शकों को पुराने दौर की मजेदार कॉमेडी याद आ जाती है। ‘हेरा फेरी’, ‘गरम मसाला’ और ‘भूल भुलैया’ जैसी फिल्मों ने उम्मीदें काफी बढ़ा दी हैं। यही वजह है कि ‘भूत बंगला’ से भी लोगों को बड़ा मनोरंजन चाहिए था, लेकिन फिल्म उम्मीद जितनी मजेदार नहीं बन पाई।
कहानी एक पुराने बंगले से शुरू होती है, जहां अजीब घटनाएं होती रहती हैं। कुछ किरदार वहां पहुंचते हैं और फिर डर, भ्रम और हंसी का सिलसिला शुरू होता है। सुनने में प्लॉट रोचक लगता है, लेकिन स्क्रीन पर यह उतना असरदार नहीं दिखता। कहानी कई जगह भटकती है और पकड़ ढीली पड़ जाती है।
फिल्म की सबसे कमजोर कड़ी इसकी कॉमेडी है। जिन सीन पर हंसी आनी चाहिए, वहां मुस्कुराहट भी मुश्किल से आती
अक्षय कुमार और प्रियदर्शन की जोड़ी का नाम आते ही दर्शकों को पुराने दौर की मजेदार कॉमेडी याद आ जाती है। ‘हेरा फेरी’, ‘गरम मसाला’ और ‘भूल भुलैया’ जैसी फिल्मों ने उम्मीदें काफी बढ़ा दी हैं। यही वजह है कि ‘भूत बंगला’ से भी लोगों को बड़ा मनोरंजन चाहिए था, लेकिन फिल्म उम्मीद जितनी मजेदार नहीं बन पाई।
कहानी एक पुराने बंगले से शुरू होती है, जहां अजीब घटनाएं होती रहती हैं। कुछ किरदार वहां पहुंचते हैं और फिर डर, भ्रम और हंसी का सिलसिला शुरू होता है। सुनने में प्लॉट रोचक लगता है, लेकिन स्क्रीन पर यह उतना असरदार नहीं दिखता। कहानी कई जगह भटकती है और पकड़ ढीली पड़ जाती है।
फिल्म की सबसे कमजोर कड़ी इसकी कॉमेडी है। जिन सीन पर हंसी आनी चाहिए, वहां मुस्कुराहट भी मुश्किल से आती है। कई जोक्स पुराने लगते हैं और कुछ जगह मजाक जबरन डाला गया महसूस होता है। संवादों में वह धार नहीं है, जिसकी इस जोड़ी से उम्मीद की जाती है।
अक्षय कुमार अपनी ऊर्जा और टाइमिंग से फिल्म को संभालने की कोशिश करते हैं। कुछ दृश्यों में उनका अंदाज पसंद आता है, लेकिन कमजोर स्क्रिप्ट उन्हें खुलकर चमकने नहीं देती। बाकी कलाकार भी ठीक काम करते हैं, मगर किरदार याद नहीं रह जाते।
प्रियदर्शन की पहचान तेज रफ्तार कॉमेडी और उलझनों से भरी कहानी रही है। यहां वही जादू कम नजर आता है। हॉरर और कॉमेडी का मेल भी पूरी तरह बैठ नहीं पाता। कुछ दृश्य अच्छे बनते हैं, लेकिन फिल्म लगातार मनोरंजन नहीं कर पाती।
तकनीकी पक्ष में बंगले का सेट और माहौल अच्छा है। बैकग्राउंड म्यूजिक भी कुछ जगह असर डालता है। मगर सिर्फ माहौल से फिल्म नहीं चलती, आखिरकार दर्शक कहानी और मनोरंजन देखने आते हैं।
कुल मिलाकर, ‘भूत बंगला’ एक औसत फिल्म है, जिसमें अच्छे कलाकार होने के बावजूद दमदार कंटेंट की कमी साफ दिखती है। अगर आप हल्की-फुल्की टाइमपास फिल्म देखना चाहते हैं तो एक बार मौका दे सकते हैं, लेकिन इसे लंबे समय तक याद रखना मुश्किल है।