आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के बाद सियासी माहौल गर्म हो गया है। बुधवार सुबह जांच एजेंसी ने पंजाब और हरियाणा में उनसे जुड़े कई ठिकानों पर कार्रवाई की। छापेमारी की खबर सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।
सबसे ज्यादा हलचल उस दावे ने मचाई, जिसमें आम आदमी पार्टी के कुछ नेताओं ने कहा कि इस कार्रवाई के पीछे पार्टी के भीतर की खींचतान भी हो सकती है। दावा किया गया कि सांसद राघव चड्ढा और उनके करीबी गुट की नाराजगी के चलते अशोक मित्तल को निशाने पर लिया गया। हालांकि इस आरोप पर न तो राघव चड्ढा की ओर से कोई प्रतिक्रिया आई है और न ही पार्टी ने आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि की है।
ED की टीम ने जिन परिसरों
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के बाद सियासी माहौल गर्म हो गया है। बुधवार सुबह जांच एजेंसी ने पंजाब और हरियाणा में उनसे जुड़े कई ठिकानों पर कार्रवाई की। छापेमारी की खबर सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।
सबसे ज्यादा हलचल उस दावे ने मचाई, जिसमें आम आदमी पार्टी के कुछ नेताओं ने कहा कि इस कार्रवाई के पीछे पार्टी के भीतर की खींचतान भी हो सकती है। दावा किया गया कि सांसद राघव चड्ढा और उनके करीबी गुट की नाराजगी के चलते अशोक मित्तल को निशाने पर लिया गया। हालांकि इस आरोप पर न तो राघव चड्ढा की ओर से कोई प्रतिक्रिया आई है और न ही पार्टी ने आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि की है।
ED की टीम ने जिन परिसरों में तलाशी ली, वहां वित्तीय दस्तावेजों और कारोबारी लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले गए। शुरुआती जानकारी के मुताबिक जांच विदेशी निवेश और आर्थिक अनियमितताओं से जुड़े मामलों पर केंद्रित है। एजेंसी की ओर से विस्तृत बयान अभी सामने नहीं आया है।
अशोक मित्तल शिक्षा जगत का बड़ा नाम हैं। Lovely Professional University के संस्थापक के रूप में उन्होंने अलग पहचान बनाई और बाद में राजनीति में कदम रखा। आम आदमी पार्टी ने उन्हें राज्यसभा भेजा था। हाल के महीनों में पार्टी के भीतर उनकी भूमिका बढ़ी थी, जिससे उनका राजनीतिक महत्व भी बढ़ता दिख रहा था।
इसी बीच राघव चड्ढा का नाम विवाद में आने से मामला और दिलचस्प हो गया है। पार्टी के युवा चेहरों में गिने जाने वाले राघव संगठन में मजबूत पकड़ रखते हैं। ऐसे में अंदरूनी मतभेद की चर्चाओं ने राजनीतिक हलकों का ध्यान खींच लिया है।
विपक्ष ने इस मौके पर आप पर हमला बोलते हुए कहा कि जो पार्टी पारदर्शिता और ईमानदारी की बात करती थी, अब उसके नेता जांच एजेंसियों के घेरे में हैं। वहीं आप समर्थकों का कहना है कि यह दबाव की राजनीति है और विपक्षी नेताओं को परेशान करने की कोशिश की जा रही है।
अब नजर इस बात पर है कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और पार्टी नेतृत्व इस पूरे विवाद पर क्या रुख अपनाता है। पंजाब की राजनीति में इसका असर आने वाले दिनों में साफ दिखाई दे सकता है।