भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन की ओर से लगातार किए जा रहे दावों और गतिविधियों पर भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिबल ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि चीन का रुख केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके क्षेत्रीय प्रभाव का असर भूटान जैसे पड़ोसी देश पर भी दिखाई देता है।
सिबल की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन की ओर से नाम बदलने और क्षेत्र पर अपने दावे को दोहराने की गतिविधियां लगातार सामने आती रही हैं। भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि अरुणाचल प्रदेश देश का अभिन्न हिस्सा है और चीन के इस तरह के दावों को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
अरुणाचल को लेकर चीन का पुराना दावा
अरुणाचल प्रदेश को चीन
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन की ओर से लगातार किए जा रहे दावों और गतिविधियों पर भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिबल ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि चीन का रुख केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके क्षेत्रीय प्रभाव का असर भूटान जैसे पड़ोसी देश पर भी दिखाई देता है।
सिबल की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन की ओर से नाम बदलने और क्षेत्र पर अपने दावे को दोहराने की गतिविधियां लगातार सामने आती रही हैं। भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि अरुणाचल प्रदेश देश का अभिन्न हिस्सा है और चीन के इस तरह के दावों को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
अरुणाचल को लेकर चीन का पुराना दावा
अरुणाचल प्रदेश को चीन लंबे समय से अपने क्षेत्र का हिस्सा बताता रहा है। चीन इस इलाके को अलग नाम से संबोधित करता है और समय-समय पर यहां के स्थानों के नाम बदलने की कोशिश भी कर चुका है। भारत ने ऐसी कार्रवाइयों को खारिज करते हुए कहा है कि नाम बदलने से जमीन पर वास्तविक स्थिति नहीं बदलती।
चीन की ओर से अरुणाचल के कई स्थानों के नामों को बदलने की कोशिश को विशेषज्ञ केवल सामान्य प्रशासनिक कदम नहीं मानते। इसे क्षेत्र पर अपने दावे को मजबूत करने की रणनीति के तौर पर भी देखा जाता है।
कंवल सिबल ने भूटान का मुद्दा क्यों उठाया?
पूर्व विदेश सचिव कंवल सिबल ने चीन की नीति के संदर्भ में भूटान का भी उल्लेख किया। उनका तर्क है कि भारत के अलावा भूटान भी चीन की क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं से अछूता नहीं है।
भूटान की भौगोलिक स्थिति भारत और चीन दोनों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। खासकर भारत-भूटान-चीन के त्रिकोणीय क्षेत्र के आसपास होने वाली गतिविधियों का सीधा संबंध भारत की सुरक्षा चिंताओं से जुड़ता है। डोकलाम विवाद के दौरान भी यही रणनीतिक महत्व खुलकर सामने आया था।
चीन की नजर में क्यों महत्वपूर्ण है यह इलाका?
अरुणाचल प्रदेश की सीमा तिब्बत के साथ लगती है और यह क्षेत्र रणनीतिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। दूसरी तरफ भूटान की स्थिति भी ऐसी है कि वहां चीन की गतिविधियों को भारत अपनी सुरक्षा के नजरिए से गंभीरता से देखता है।
कंवल सिबल पहले भी भारत-भूटान संबंधों और चीन से जुड़े सुरक्षा पहलुओं पर लिख चुके हैं। उनके अनुसार भारत के लिए भूटान के साथ मजबूत सहयोग इसलिए जरूरी है क्योंकि क्षेत्र में किसी भी रणनीतिक बदलाव का असर भारत की सुरक्षा पर पड़ सकता है।
भारत का रुख साफ
अरुणाचल प्रदेश को लेकर भारत की स्थिति लंबे समय से स्पष्ट रही है। विदेश मंत्रालय कई मौकों पर कह चुका है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। चीन की ओर से क्षेत्र के नाम बदलने या नए दावे पेश करने से भारत की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आता।
इसी वजह से चीन की ऐसी कार्रवाइयों को भारत केवल सीमा विवाद के रूप में नहीं, बल्कि क्षेत्रीय दबाव की व्यापक रणनीति के हिस्से के तौर पर भी देखता है।
भूटान के लिए भी बढ़ी चुनौती
चीन और भूटान के बीच भी सीमा विवाद लंबे समय से चला आ रहा है। दोनों देशों के बीच सीमा संबंधी बातचीत जारी रही है और कुछ इलाकों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं। भारत के लिए यह विषय इसलिए अहम है क्योंकि भूटान की सीमा भारत के संवेदनशील इलाकों के करीब है।
ऐसे में चीन की किसी भी बड़ी रणनीतिक गतिविधि पर नई दिल्ली की नजर बनी रहती है।
आगे क्या?
अरुणाचल प्रदेश और भूटान से जुड़े घटनाक्रम आने वाले समय में भारत की विदेश और सुरक्षा नीति के लिए महत्वपूर्ण बने रह सकते हैं। चीन के साथ सीमा विवाद का समाधान बातचीत और कूटनीतिक माध्यमों से करने की कोशिश जारी है, लेकिन भारत अपनी क्षेत्रीय अखंडता को लेकर लगातार सख्त रुख अपनाता रहा है।
कंवल सिबल की टिप्पणी ने एक बार फिर इस बहस को सामने ला दिया है कि भारत को केवल अपनी सीमा पर ही नहीं, बल्कि पड़ोसी देशों में चीन की बढ़ती रणनीतिक सक्रियता पर भी लगातार नजर रखनी होगी।
निष्कर्ष
अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन की गतिविधियां और उसके पुराने क्षेत्रीय दावे भारत के लिए कोई नया विषय नहीं हैं। लेकिन भूटान के संदर्भ को जोड़कर कंवल सिबल ने इस मुद्दे का व्यापक रणनीतिक पहलू सामने रखा है। भारत के सामने चुनौती केवल सीमा पर अपने दावे को मजबूती से रखने की नहीं, बल्कि पड़ोसी देशों के साथ मजबूत रिश्तों के जरिए क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने की भी है।