पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में विधानसभा चुनाव का माहौल लगातार तनावपूर्ण बना हुआ है। विरोध-प्रदर्शनों और सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के बीच तीसरे चरण की 11 में से 7 सीटों पर मतदान अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया गया है। वहीं बाकी 4 सीटों पर सोमवार को मतदान कराया जा रहा है। इस घटनाक्रम ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।
इस चुनाव में पाकिस्तान की सत्तारूढ़ पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) पहले ही मजबूत स्थिति बना चुकी है। पार्टी ने शुरुआती दो चरणों में 34 में से 24 सीटों पर जीत दर्ज की है और अब क्षेत्र में सरकार बनाने की स्थिति में दिखाई दे रही है।
विरोध-प्रदर्शन बना बड़ी वजह
PoK में पिछले कुछ समय से विरोध-प्रदर्शन जारी हैं। Joint Awami Action Committee (JAAC) की ओर से चुनाव के बहिष्कार
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में विधानसभा चुनाव का माहौल लगातार तनावपूर्ण बना हुआ है। विरोध-प्रदर्शनों और सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के बीच तीसरे चरण की 11 में से 7 सीटों पर मतदान अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया गया है। वहीं बाकी 4 सीटों पर सोमवार को मतदान कराया जा रहा है। इस घटनाक्रम ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।
इस चुनाव में पाकिस्तान की सत्तारूढ़ पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) पहले ही मजबूत स्थिति बना चुकी है। पार्टी ने शुरुआती दो चरणों में 34 में से 24 सीटों पर जीत दर्ज की है और अब क्षेत्र में सरकार बनाने की स्थिति में दिखाई दे रही है।
विरोध-प्रदर्शन बना बड़ी वजह
PoK में पिछले कुछ समय से विरोध-प्रदर्शन जारी हैं। Joint Awami Action Committee (JAAC) की ओर से चुनाव के बहिष्कार की अपील भी की गई है। विरोध का एक प्रमुख मुद्दा विधानसभा की उन 12 आरक्षित सीटों से जुड़ा है, जो भारतीय प्रशासन वाले कश्मीर से विस्थापित लोगों के लिए निर्धारित हैं।
प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि इन सीटों से क्षेत्र के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का संतुलन प्रभावित होता है। सरकार की ओर से कई मांगों को स्वीकार किए जाने की बात कही गई है, लेकिन आरक्षित सीटों का मुद्दा संवैधानिक बदलाव से जुड़ा होने के कारण अलग बना हुआ है।
7 सीटों पर क्यों टला मतदान?
तीसरे चरण की 11 सीटों में से 7 पर सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए मतदान टालने का फैसला लिया गया। रिपोर्टों के मुताबिक इन क्षेत्रों में तनाव को देखते हुए चुनाव कराना प्रशासन के लिए चुनौती बन गया था।
वहीं चार सीटों पर मतदान जारी रखा गया है। चुनाव अधिकारियों के सामने चुनौती यह है कि बाकी सीटों पर मतदान कब कराया जाएगा और तब तक राजनीतिक माहौल कितना सामान्य हो पाता है।
PML-N की स्थिति मजबूत
शुरुआती दो चरणों के नतीजों ने PML-N को स्पष्ट बढ़त दिला दी है। पार्टी 24 सीटें जीत चुकी है और इस प्रदर्शन के बाद उसके क्षेत्रीय सरकार बनाने की संभावना काफी मजबूत मानी जा रही है।
PML-N की इस बढ़त का महत्व इसलिए भी है क्योंकि क्षेत्र में लंबे समय बाद सत्ता के समीकरण बदलने की स्थिति बन रही है। हालांकि अंतिम तस्वीर तीसरे चरण की बची हुई सीटों के परिणाम आने के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।
सुरक्षा के बीच हो रहा मतदान
चुनाव के अंतिम चरण में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी की गई है। पिछले हफ्तों में विरोध और झड़पों की घटनाओं के कारण प्रशासन अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है। मतदान केंद्रों के आसपास सुरक्षा बलों की मौजूदगी बढ़ाई गई है ताकि किसी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
आगे क्या होगा?
अब सबसे बड़ा सवाल उन 7 सीटों का है, जहां मतदान टाल दिया गया है। इन सीटों के लिए नई तारीख कब तय होगी, यह चुनाव आयोग और स्थानीय प्रशासन की स्थिति पर निर्भर करेगा।
फिलहाल PML-N 24 सीटों के साथ सबसे मजबूत स्थिति में है। अगर पार्टी बाकी चुनावी प्रक्रिया में भी अपनी बढ़त बनाए रखती है, तो PoK में नई सरकार के गठन का रास्ता साफ हो सकता है।
निष्कर्ष
PoK चुनाव में विरोध-प्रदर्शनों और सुरक्षा संबंधी चिंताओं ने तीसरे चरण की प्रक्रिया को प्रभावित किया है। 11 में से 7 सीटों पर मतदान स्थगित होने के बावजूद 4 सीटों पर मतदान कराया जा रहा है। दूसरी ओर PML-N पहले दो चरणों में 24 सीटें जीतकर सरकार बनाने की दौड़ में काफी आगे निकल चुकी है। अब नजर इस बात पर है कि स्थगित सीटों पर मतदान कब होता है और अंतिम नतीजे क्षेत्र की राजनीति को किस दिशा में ले जाते हैं।